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जानिए क्या है चक्रवातों का जल्द पता लगाने का नया तरीका

चक्रवातओं का जल्द पता लगाने के लिए वैज्ञानिकों ने एक नया तरीका खोजा है। इसमें समुद्र की सतह पर सेटेलाइट द्वारा पता लगाने से पहले वातावरण में पूर्वी चक्रवाती भवरों की शुरुआती पहचान और उसके विकास पर नजर रखी जाती है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग ने बुधवार को यह जानकारी दी।

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चक्रवातों का जल्द पता लगाने के लिए वैज्ञानिकों ने एक नया तरीका खोजा है। इसमें समुद्र की सतह पर सेटेलाइट द्वारा पता लगाने से पहले वातावरण में पूर्वी चक्रवाती भवरों की शुरुआती पहचान और उसके विकास पर नजर रखी जाती है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग ने बुधवार को यह जानकारी दी।
Cyclone | Cyclone: वैज्ञानिकों ने ईजाद किया नया तरीका, अब चक्रवाती तूफानों का जल्द पता चलेगा

चक्रवातों के बारे में जल्द जानकारी जुटाने के लिए अभी रिमोट सेंसिंग तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। इस तकनीक के जरिए चक्रवात का पता तभी लग जाता है जब समुद्र की गर्म सताह पर निम्न दबाव के क्षेत्र के रूप में अच्छी तरह चिन्हित करने में सक्षम चक्रवात विकसित हो जाता है। विभाग के मुताबिक चक्रवात के बारे में जल्द से जल्द जानकारी मिलने और उसके प्रभाव के बीच अधिक समय मिलने से तैयारियों में मदद मिल सकती है। चक्रवातों के बारे में जल्द जानकारी मिलने के व्यापक सामाजिक व आर्थिक प्रभाव है।

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वैज्ञानिकों ने इस तकनीक की खोज के लिए उत्तर हिंद महासागर में विकसित हुए मानसून बाद के चार बड़े चक्रवातों फेलिन (2013), वरदा (2013), गाजा (2018) व माडी (2013) और दो मानसून पूर्व चक्रवातों का अध्ययन किया। यह शोध हाल में ही ‘एटमास्फेरिक रिसर्च’ जनरल में प्रकाशित हुआ है।

आईआईटी खड़गपुर की जिया अल्बर्ट, विष्णुप्रिया साहू और प्रसाद के. भास्करन समेत शोध टीम के सदस्यों ने पाया कि यह तरीका मानसून पूर्व और मानसून बाद के मौसम में विकसित होने वाले चक्रवातों की उत्पत्ति के बारे में न्यूनतम 4 दिनों का पूर्वानुमान लगाने में मदद कर सकता है।

Scientists devise novel method for early detection of tropical cyclones | Deccan Herald

चक्रवात की उत्पत्ति ऊपरी वायुमंडल के स्तरों पर होती है और मानसून के बाद के मामलों की अपेक्षा मानसून पूर्व के मामलों में उनका पता जल्द लगाया जा सकता है। इस अध्ययन में चक्रवात विकसित होने वाले मामलों और चक्रवात विकसित नहीं होने वाले, दोनों ही मामलों में वायुमंडल में भंवरों के व्यवहार की विस्तृत पड़ताल और तुलना की गई। यह शोध जलवायु परिवर्तन कार्यक्रम के तहत विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सहयोग से किया गया है।

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