चर्चा में राजनीति के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ जब...

राजनीति के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ जब मुख्यमंत्री बनने जा रहा नेता अपनी पत्नी के वोट से हार गया!

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अमित विक्रम शुक्ला

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राजनीति के लिहाज से स्वतंत्र भारत में ऐसे कई चुनाव हुए हैं. जिन्होंने न सिर्फ उम्मीदवारों की साँसे रोक दीं. बल्कि उनके समर्थकों की तो जैसे जान सी निकाल दी हो. और जब बात चुनाव जीतने के बाद सीधे मुख्यमंत्री बनने की हो, तो फिर कहनें ही क्या…

खैर अगर आप राजनीति में दिलचस्पी रखते हैं, आपको यह खबर जरूर पढ़नी चाहिए. क्योंकि ये आपने अंदर की नेतागिरी को सीधे तौर पर चुनौती दे सकता है. और हाँ… अगर राजनीति में रूचि नहीं है. और नेताओं का रउला भी मन को नहीं भाता है, तब भी पढ़ो.  काहे कि पढोगे. तभी तो गली-मोहल्ले की नुक्कड़ वाली दुकानों पर ज्ञान बांच पाओगे. तो पढ़ो.

दरअसल, बात है 2008 के विधानसभा चुनाव की और ये हो रहा था राजस्थान में. कइयों धुरंधर मैदान में थे. और ख़ास बात सब अपने आपको जीता हुआ मान रहे थे. कोई बात नहीं. मानना भी चाहिए. नहीं तो समर्थकों में जोश कैसे भरेंगे.

लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा थी. कांग्रेस पार्टी के मुख्यमंत्री उम्मीदवार की. जिनका नाम था सीपी जोशी. जोकि नाथद्वारा सीट से चुनावी महासंग्राम में थे.

joshi

मतलब साफ़ था कि जोशी जी जीते तो सीधे ही सूबे के मुखिया बनेंगे. बड़ा जोश था जोशी जी के चाहने वालों में. क्योंकि भैया. सीएम साहब जो बनने जा रहे थे.

लेकिन जब चुनाव परिणाम आये, तो मानों जैसे सीपी जोशी और उनके समर्थकों के पैरों तले से ज़मीन खिसक गयी हो. और हुआ भी कुछ ऐसा ही था.

क्योंकि जोशी मात्र एक वोट से अपनी सीट और मुख्यमंत्रित्व के पांच साल से हाथ धो बैठे थे. कांग्रेस आलाकमान के लिए भी ये किसी बड़े झटके से कम नहीं था.

बता दें ये हार भाजपा विधायक कल्याण सिंह के हाथों मिली थी. ये कहना बिलकुल गलत नहीं होगा कि इस हार ने जोशी का पूरा सियासी समीकरण बिगाड़कर रख दिया था.

सबसे रोचक बात. जोकि अब पढ़ें…

वो बात ये है कि सीपी जोशी को मात्र एक वोट से हार मिली. लेकिन इस हार की जिम्मेदार और कोई नहीं. बल्कि उनकी पत्नी रहीं. क्योंकि उनका वोट नहीं डल पाया था. तो अप्रत्यक्ष रूप से ही सही. जिम्मेदारी तो उन्ही की बनती है. लेकिन इसे सीपी जोशी का दुर्भाग्य ही कहा जायेगा कि उनकी पत्नी का वोट किसी कारणवश नहीं डल पाया. और उन्हें हार भी सिर्फ एक वोट से ही मिली.

कहानी ख़तम. खूब पढ़ें, खूब बढ़ें…

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