चर्चा में COVID-19: 21 दिन नहीं, 6 महीने का होगा लॉकडाउन!

COVID-19: 21 दिन नहीं, 6 महीने का होगा लॉकडाउन!

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अमित विक्रम शुक्ला

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कोरोना वायरस से पूरी दुनिया जंग लड़ रही है। लेकिन इस वायरस पर फिलहाल काबू पाने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है. ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि आखिर आम ज़िन्दगी को पटरी पर लौटने में कितना वक्त लगेगा? दुनिया के सबसे बड़े लॉकडाउन के दूसरे हफ्ते में प्रवेश के साथ ये सवाल हर जुबान पर है.

तो आइये इस सवाल के तहत कुछ प्रमुख विशेषज्ञों की राय जानते हैं.

कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि तीन हफ्ते के लॉकडाउन की कामयाबी या नाकामी पर ही भारत की नोवेल कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई का नतीजा निर्भर करेगा. अगर देश बीमारी के फैलने पर 14 अप्रैल तक नियंत्रण रख पाता है, तो एक महीने के अंदर जिंदगी सामान्य हो सकती है. वो भी लोगों के निजी स्तर पर और संस्थानों की ओर से सावधानियां बरतने, सोशल डिस्टेंसिंग उपायों का पालन करने के साथ.

सार्वजनिक कार्यक्रम या बड़ी संख्या में लोगों का इकट्ठा होना अगले कुछ महीनों के लिए प्रतिबंधित रहेगा. सरकार को सर्दियों में बीमारी के फिर सिर उठाने की संभावना से निपटने के लिए भी तैयारी करनी होगी. लेकिन अगर लॉकडाउन नाकाम रहता है तो विशेषज्ञ आशंका जताते हैं कि देश को कम से कम 6 से 8 महीने संकट से रिकवर करने में लग सकते हैं.

ट्रिविट्रॉन हेल्थकेयर के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर जीएसके वेलू कहते हैं, “हम ये सब खत्म होने की उम्मीद नहीं करते. मैं कहना चाहूंगा कि पूरी तरह रिकवर होने में कम से कम छह महीने लगेंगे. साथ ही इसे समझने और रिस्पॉन्स करने में ही दो महीने लग जाएंगे.

यूनिवर्सिटी ऑफ कैम्ब्रिज के रिसर्चर्स की ओर से प्रकाशित एक मैथेमैटिकल मॉडल के मुताबिक 21 दिन का मौजूदा लॉकडाउन शायद ही कारगर साबित हो. इससे अपेक्षित नतीजे नहीं आने पर वायरस को काबू में रखने के लिए फिर लॉकडाउन्स की चेन की आवश्यकता होगी.

कुछ विशेषज्ञ और स्टडीज का मानना है कि गर्मी और आद्रता वायरस के संक्रमण की रफ्तार को धीमा कर सकती है. कंफेडेरेशन ऑफ मेडिकल एसोसिएशन्स इन एशिया एंड ओशेनिया के अध्यक्ष डॉ के के अग्रवाल कहते हैं, ‘ऐसी संभावना है कि ये वायरस SARS की तरह हिट एंड रन वायरस साबित हो सकता है और शायद दोबारा कभी न लौटे.

ये भी संभावना है जैसे कि अटकलें लगाईं जा रही हैं कि गर्मी और आद्रता की वजह से मई, जून और जुलाई के महीनों में वायरस इतना असरदार न रहे.’ अगर ऐसा होता है तो सामान्य जनजीवन गर्मी के शुरू होने के साथ मई और जून में पटरी पर लौट सकता है.

विशेषज्ञ कहते हैं कि स्थिति चाहे कोई भी हो हमें सक्रिय मरीजों की पहचान, आइसोलेशन और इलाज से जुड़े उपायों की जरूरत होगी. सोशल डिस्टेंसिंग जैसी सावधानियां बरतना, बड़ी सभाओं पर रोक जैसे कदम सर्दियों के शुरू होने तक जारी रहने चाहिए.

संक्रमण फैलने की एक और लहर साल के आखिर तक संभव है, तब फिर लॉकडाउन और सार्वजनिक जगहों को बंद करने जैसे कदम उठाए जा सकते हैं. कुछ विशेषज्ञ आगाह करते हैं कि तापमान बढ़ने या आद्रता बढ़ने से वायरस पर सीमित ही असर हो सकता है.

ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हाईजीन एंड पब्लिक हेल्थ के पूर्व निदेशक प्रो. अरुणाभ मजूमदार ने कहा, ‘गर्मी का तापमान निश्चित तौर पर कोरोना वायरस का फैलना न्यूनतम करने में मदद करेगा. लेकिन ये Covid-19 संकट के लोगों पर असर पर निर्भर करेगा.’

डॉ वेलू का इस संबंध में कहना है, ‘ऐसा कोई डेटा नहीं जो इसे मौसमी बताए या गर्मी के असर की बात कहे. ये कुछ विचार प्रकिया है लेकिन इस पर असल कोई डेटा उपलब्ध नहीं है.’

विशेषज्ञ राय के मुताबिक मेडिकल थिरेपी से अधिक सामान्य स्थिति की टाइमलाइन पर असर डालने वाला और कोई फैक्टर नहीं हो सकता. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने नोवेल कोरोना वायरस के लिए संभावित टीका (वैक्सीन) आने में 12 से 18 महीने लगने की संभावना जताई है.

वैक्सीन ट्रायल को इस महीने के शुरू में लीड करने वाली एक अमेरिकी फार्मा कंपनी ने इस संबंध में आशा जताई है. इस कंपनी का कहना है इस साल सितंबर तक सीमित वैक्सीन विकसित किए जाने की संभावना है. इसका कॉमर्शियल तौर पर उत्पादन इस साल के आखिर तक शुरू हो सकता है.

अगर ऐसा होता है तो जिंदगी एक साल में पूरी तरह सामान्य हो जाएगी. फिर अगले साल गर्मियों तक अंतर्राष्ट्रीय यात्राएं, बड़े खेल आयोजन, बिना सोशल डिस्टेंसिंग, संभव हो पाएंगे. लेकिन अगर वैज्ञानिक सीमित ड्रग या वैक्सीन बनाने में नाकाम रहे तो विशेषज्ञ चेताते हैं कि जिंदगी फिर शायद ही कभी सामान्य पटरी पर लौट सके.

सोशल डिस्टेंसिंग फिर लंबे वक्त तक बनी रहेगी. इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय यात्राओं के लिए हेल्थ सर्टिफिकेट की मांग फिर आम प्रैक्टिस हो जाएगी. साथ ही आंशिक लॉकडाउन भी जिंदगी का हिस्सा बन जाएंगे.

तो ये हैं विशेषज्ञों के राय. लेकिन अब अगर रिकवर होने 6-8 महीने का लम्बा वक्त लगता है, तो परेशानियां जायज़ हैं. अब इनसे निपटने के लिए क्या रणनीति बनाई जाती हैं. यह देखने-समझने में भी समय सकता है.

फिलहाल, घर पर रहें, सुरक्षित रहें।

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