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कोविड से मरने वालों के सरकारी आंकड़ो को आईना दिखाती, बीबीसी की विशेष पड़ताल

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दुनिया कोरोना महामारी जैसी अभूतपूर्व संकट से गु़ज़र रही है। भारत भी इस महामारी के दंश से अछुता नही रहा। इसके उलट भारत उन देशों की कतार में आगे रहा जहां करोना ने सबसे ज्यादा तबाही मचाई। देश का कोई भी क्षेत्र इस महामारी से अछुता नही रहा। इन सबके बीच महामारी के दौरान सरकारी चुप्पी, निष्र्कियता, बेबसी और चुनावो के दौरान लापरवाही ने भी देश की राजनिती को बेनकाब किया।

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कोरोना के दूसरी लहर और पहले की लहर में मरने वालों की संख्या को लेकर सरकारी आंकडो पर भी संशय बरकरार है। इस मुद्दे पर बीबीसी ने अपने विशेष पड़ताल पर एक लेख जारी किया है। लेख में कई ऐसे मुद्दे और आंकडे हैं जो सरकारी आकंड़ों को आईना दिखाने का काम कर रहें है।

पड़ताल में बताया गया है कि कोरोना से हुई मौतों के सरकारी आकडों और जमीनी हकीकत में बड़ा फर्क है। बीबीसी ने लिखा है कि इस पड़ताल के लिए टीम ने 12 क़स्बों और शहरों में शवदाह गृहों, श्मशान घाटों, क़ब्रिस्तानों, अस्पतालों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और अन्य लोगों से बात की, जिससे 1 से 15 मई के बीच ‘कोविड डेथ’ के तौर पर दर्ज मौतों और ज़मीनी हालात की तुलना किया जा सके.

दूसरी लहर में जब कोरोना अपने शिखर पर था। कई राज्यों में लोग अपनो के अंतिम संस्कार के लिए संघर्ष कर रहे थे। पड़ताल में पाया गया कि मरने वालों का आंकड़ा सभी जगह नहीं उपलब्ध था. हालांकि एक बात तो एकदम साफ़ है. कोरोना से हुई मौतों की आधिकारिक संख्या कम करके बताई गई है.

पड़ताल में कुछ शहरों का चुनाव किया गया। जहां मई की शुरुआत में संक्रमण के मामले अधिक थे. इनमें बिजनौर, दरभंगा, जमशेदपुर, जौनपुर, करीमनगर, मानसा, नागपुर, पटना, प्रयागराज, रायपुर, सीकर और शिमला थे.

उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश के जौनपुर ज़िले में 1 से 15 मई के बीच सरकारी रजिस्टर में कोरोना से 51 मौतें दर्ज की गईं. लेकिन अकेले जौनपुर के पिलकिचिया घाट पर 431 (जिसमें कोरोना और ग़ैर-कोरोना पीड़ित लोगों के शव शामिल थे) लोगों का अंतिम संस्कार किया गया. स्थानीय लोग बताते हैं कि आम तौर पर इतने दिनों में 70 से 100 के बीच अंतिम संस्कार होते हैं.

शहर के अन्य बड़े श्मशान स्थल रामघाट और अंतिम संस्कार के सात छोटे ठिकानों के आंकड़े उपलब्ध न होने से हमें शायद ये कभी न पता चल सके कि वहां कितने लोगों का दाह संस्कार हुआ.

सामाजिक कार्यकर्ता सत्यवीर सिंह अक्सर इन घाटों पर जाते रहते हैं और वो रामघाट पर काम करने वालों के संपर्क में ही रहते हैं. सत्यवीर बताते हैं कि 1 से 15 मई के दौरान हर दिन क़रीब 500 शव जलाए गए. जबकि महामारी से पहले श्मशान घाटों पर 100 से 125 लोगों के अंतिम संस्कार होते थे. रामघाट के संचालक राकेश भी यही कहते हैं कि महामारी के बुरे दिनों में हर दिन पांच सौ से सात सौ शव जलाए जा रहे थे. लगातार जलती चिताओं की तपिश का आलम ये था कि ऊपर लगा टिन शेड गर्म होकर से पिघल गया.

उत्तर प्रदेश राज्य के ही प्रयागराज में 1 से 15 मई के दौरान कोरोना से 140 आधिकारिक मौतें दर्ज की गईं. लेकिन शहर के सबसे बड़े फाफामऊ घाट श्मशान स्थल पर तैनात एक पुलिस अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बीबीसी को बताया कि इस दौरान तीन सौ से ज़्यादा कोरोना पीड़ितों के शव जलाए गए. फाफामऊ घाट के एक हिस्से को कोविड पीड़ितों के अंतिम संस्कार के लिए अलग रखा गया था.

कोविड से मौत बनाम कुल मौतें

नागपुर, महाराष्ट्र

नागपुर शहरी और ग्रामीण इलाक़ों में मई के पहले पखवाड़े में कुल 1132 मौतें दर्ज की गईं. इनमें से 118 वो लोग थे जो इलाज के लिए बाहर से नागपुर आए थे और उनकी मौत हो गई. बीबीसी ने केवल नागपुर शहर में हुई 4446 मौतों की पड़ताल की. नागपुर नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग की समिति के प्रमुख संजय महाजन मई में कुल मौतों की संख्या 6892 बताते हैं.

विदर्भ हॉस्पिटल एसोसिएशन के डॉक्टर अनूप मरार कहते हैं, “सेकेंड वेव के दौरान अस्पतालों में मरीज़ों की बाढ़ आ गई थी. कोरोना के बाद के इलाज की सुविधा न होने से बहुत से लोग बेमौत मर गए.”

मानसा, पंजाब

पंजाब के मानसा ज़िले में मई के पहले पखवाड़े में कोरोना से 49 आधिकारिक मौतें दर्ज की गईं. मानसा में छोटे-बड़े 300 श्मशान घाट हैं. वहीं पूरे ज़िले में क़रीब 250 क़ब्रिस्तान हैं. मानसा में 240 गांव हैं.

बीबीसी ने शहर के केवल 3 बड़े श्मशान घाटों और एक गांव के आंकड़े इकट्ठा किए तो पता चला कि कोरोना और बिना कोरोना वाले कुल 162 अंतिम संस्कार किए गए.

ग्रामीण इलाक़ों की चुनौती

भारत में कोरोना की पहली लहर में ज़्यादातर शहरी इलाक़े प्रभावित हुए थे. लेकिन दूसरी लहर ने ग्रामीण क्षेत्रों पर भी ज़बरदस्त क़हर बरपाया. भारत के बहुत से राज्यों में स्वास्थ्य का बुनियादी ढांचा या तो बेहद कमज़ोर है, या है ही नहीं. जो इलाज का बोझ उठा सकते हैं, वो शहरों की तरफ़ भागते हैं. वहीं अन्य लोग अपनी क़िस्मत के भरोसे रह जाते हैं.

महाराष्ट्र और बिहार ने कोरोना से मौत के आंकड़ों में संशोधन किए हैं. इनके आंकड़ों को देखकर अन्य राज्य भी ऐसा कर सकते हैं. मुराद बानाजी ने बीबीसी से कहा कि वो ये मानते हैं कि देश भर में कोरोना की मौतें कम-से-कम पांच गुना कम करके बताई गईं।

अगर ये आकलन सही है, तो इससे भारत में कोरोना से मौत की कुल संख्या बीस लाख के क़रीब पहुंच जाएगी. जो दुनिया में सबसे ज़्यादा होगी और कोरोना से सबसे ज़्यादा प्रभावित दुनिया के दूसरे सात देशों, अमेरिका, ब्राज़ील, मेक्सिको, पेरू, रूस, ब्रिटेन और इटली की कुल मौतों की तादाद से भी अधिक होगी.

सुप्रीम कोर्ट अब जब कोविड 19 के कारण जान गवाने वालों के परिवारों को मुआवजा देने के लिए सरकार को कहा है। उसके बाद से कोरोना से मरने वालो के सही आंकड़ों का होना और भी जरूरी हो गया है। बीबीसी ने अपनी इस विशेष पड़ताल से उन लाखों परिवारों को सहारा देने का काम करेगा, जिनके संबंधियों के मौत के आंकड़ों को भुला दिया गया था।

बीबीसी की विशेष पड़ताल को पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक में है। https://www.bbc.com/hindi/extra/sgEOffuuU9/india_uncounted_dead_hindi

 

 

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