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कोरोना के डर ने ली पति-पत्नी की जान, डॉक्टर ने हाथ लगाने से किया मना

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अमित विक्रम शुक्ला

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कोरोना का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है. परिस्थितियां ऐसी बनती जा रही हैं. जिससे लोगों में दहशत का माहौल पैदा होता जा रहा है. लेकिन ये दहशत अब जानलेवा भी साबित हो रही है.

कोरोना

दरअसल, पंजाब के अमृतसर में महामारी कोरोना वायरस के डर से खुदकुशी का मामला सामने आया है. यहां पर एक पति-पत्नी ने कोरोना वायरस के लक्षणों के डर से आत्महत्या कर ली. उन्होंने अपने सुसाइड नोट में लिखा कि हम कोरोना वायरस के कारण नहीं मरना चाहते हैं. हमें कोरोना से टेंशन हो गई थी.

यह घटना अमृतसर के बाबा बकाला के सठियाला गांव की है. मृतकों के नाम गुरजिंदर कौर और बलविंदर सिंह हैं. वहीं, डॉक्टरों ने शवों का पोस्टमॉर्टम करने से मना कर दिया. पति की उम्र 65 साल थी तो वहीं पत्नी 63 वर्ष की थी. दोनों ने जहर खाकर जान दी है.

अब आप समझ सकते हैं कि कितना भयावह मंज़र बनता जा रहा है.

बता दें कि कोरोना वायरस के डर से खुदकुशी के कई मामले सामने आ रहे हैं. इससे पहले बुधवार को ही उत्तर प्रदेश के शामली में क्वारनटीन वार्ड में भर्ती कोरोना के एक संदिग्ध मरीज ने सुसाइड कर लिया. यह युवक दो दिन पहले ही अपने गांव आया था. सांस लेने में दिक्कत होने के बाद उसे क्वारनटीन वार्ड में भर्ती कराया गया था, जिसके बाद युवक ने आत्महत्या कर ली.

उधर, दिल्ली के तबलीगी जमात के मरकज में पहुंचे एक शख्स ने भी आत्महत्या की कोशिश की. दरअसल, मरकज में पहुंचे कुछ लोगों को दिल्ली के राजीव गांधी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में भी भर्ती करवाया गया है. जहां इनमें शामिल एक शख्स ने आत्महत्या करने की कोशिश की. शख्स अस्पताल की इमारत से नीचे कूदने की कोशिश कर रहा था. हालांकि, समय रहते शख्स को बचा लिया गया.

अस्पताल में भी आत्महत्या

इससे पहले बीते माह दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भी एक कोरोना वायरस के मरीज ने खुदकुशी की थी. मरीज ने 7वीं मंजिल से कूदकर अपनी जान दे दी. 35 वर्षीय मृतक हाल ही में ऑस्ट्रेलिया के सिडनी से वापस लौटा था.

बता दें कि कोरोना वायरस के मामले देश में तेजी से बढ़ रहे हैं. अब ये आंकड़ा 2500 के पार पहुंच चुका है. वहीं, 70 से ज्यादा लोग की मौत भी हो चुकी है. लोगों में इस खतरनाक वायरस का खौफ बढ़ता जा रहा है. जिसको लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार सुझाव और सुरक्षित रहने के लिए सन्देश दे रहे हैं.

और इस महामारी से लड़ने का फिलहाल, एकमात्र तरीका लोगों से दूर और घर पर सुरक्षित रहना ही है. जिसपर अमल करें।

अंत में अमित विक्रम शुक्ला की तरफ से एक मारक ज्ञान।

‘संदिग्ध मरीज का पूरा ब्यौरा ग्राम प्रधान को सौंपे। अब अगर प्रधान जी पुलिस और ज़िला अस्पताल को सूचित किए बगैर। चुनावी कार्ड खेलें, तो उन्हें पूरा मौका दें. “खेलने” का. क्योंकि आपका भी खेलने का समय बस लगभग आ चुका है.

(ग्रामसभावासियों के हित के लिए प्रधान होते हैं. वोटबैंक के लिए नहीं)

नमस्कार।

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