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साहित्य की दुनिया में वो नायाब हीरा हैं जिनकी चमक से समाज से छटा है अंधियारा, आखिर वो है कौन? जानें

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“हीरे की सही परख एक जौहरी को ही होती है। अगर वह उसे अपने अंदाज़ में तराश दे, तो वो दुनिया का सबसे नायाब व बेशकीमती हीरा बन सकता है”। साहित्य की दुनिया का एक ऐसा ही हीरा बन कर उभरी हैं… श्रीमती कुंकुम चतुर्वेदी जी। और इनके लेखन “मरहम” को तराश कर दुनिया के सामने लाने वाला जौहरी है…ऑनलाइन गाथा
पब्लिकेशन। ऑनलाइन गाथा की सदस्या निकिता सक्सेना की कुंकुम जी से हुई बातचीत पर, आइए डालें एक नज़र।

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1.पब्लिकेशन हाउस की दिनों-दिन बढ़ती भीड़ में आप किस प्रकाशक पर भरोसा कर सकते हैं?

सवाल तो ये बहुत अच्छा है क्योंकि ये सच में लेखक के लिए एक बहुत बड़ा चिंता का विषय होता है कि वो अपनी पुस्तक कहां से पब्लिश करवाएं। मैंने 4-5 प्रकाशकों के साथ काम किया है और मुझे लगता है कि मेरा अब तक का सबसे बेस्ट एक्सपीरियंस ऑनलाइन गाथा के साथ रहा है, इसलिए मैं ऑनलाइन गाथा पर आँख बंद करके भरोसा कर सकती हूं।

2. सेल्फ-पब्लिशिंग कंपनियों में इन दिनों कौन ज़्यादा बेहतर है?

सेल्फ-पब्लिशिंग टूल एक बेहद बढ़िया विकल्प है, खासतौर पर युवा लेखकों के लिए। लेकिन सेल्फ-पब्लिशिंग जैसी फ्री सर्विस के चलते कई बार लेखकों को प्रकाशकों के दफ्तर के चक्कर काटते हुए भी देखा है। ऐसे में ज़रूरत है, एक ऐसे पब्लिशिंग हाउस की जो फ्री सर्विस में भी पेड सर्विस जैसी सुविधा दे और इस सर्विस को प्रोवाइड करवाने में ऑनलाइन गाथा से बेहतर कोई नहीं।

3. प्रूफरीडिंग की सर्विस के लिहाज़ से कौन सा पब्लिकेशन बेस्ट है?

लेखन होने के नाते मैं दूसरे लेखकों की भी किताबें पढ़ना पसंद करती हूं। मगर बुरा तब लगता है जब उसमें टाइपिंग या अन्य किसी कारण त्रुटियां देखती हूं इसलिए मुझे अपने लिए एक ऐसे प्रकाशक की आवश्यकता थी जो प्रूवरीडिंग में बेस्ट हो, और मुझे ये कहते हुए बहुत खुशी है कि ऑनलाइन गाथा पूरी उम्मीद पर पूरी तरह से खरा उतरा।

4. आपके अनुसार बुक पब्लिशिंग में कितना वक्त लग जाता है?

ओह…मत पूछिए! ये तो एक बेहद लंबा प्रॉसैस है जिसमें बार-बार लेखक को भी भागना पड़ता है। मगर ऑनलाइन गाथा ने इस चक्कर लगाने की प्रक्रिया को ऑनलाइन बनाकर बहुत आसान बना दिया है और वक्त को भी कम कर दिया है।

5. बुक प्रमोशन में प्रकाशकों का क्या महत्व है?

साहित्य की दुनिया बहुत बड़ी है और इस दुनिया में अपनी पहचान बनाना बहुत मुश्किल है। खासतौर पर उभरते हुए लेखक के लिए, ऐसे में प्रकाशक ही है जो लेखक की लेखनी को पहचान दिलाता है। बात करूं अगर ऑनलाइन गाथा की तो ये बुक फेयर्स, विमोचन समारोह जैसे अन्य आदि ईवेंट्स के माध्यम से बुक को प्रमोट करने में बहुत मदद करते हैं। प्रेस रिलीज़ के ज़रिए जन-जन तक पुस्तक की जानकारी प्राप्त करवाते हैं साथ ही रूबरू मंच के माध्यम से लेखक को सम्मानित भी करते हैं।

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